ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 30 November 2025
वक़्त का सुबूत
उसने समझ लिया था मुझे वक़्त का सुबूत,
लेकिन ये ज़िन्दगी भी कभी सच कहाँ हुई।
उर्मिला माधव
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