ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 28 November 2025
ज़ख़्म
ये ऐसे ज़ख़्म हैं जिनका कोई बदल ही नहीं,
किसीका यूं ही बिछड़ जाना फिर नहीं आना
उर्मिला माधव
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