ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 24 November 2025
बरसता है जो आंखों से
बरसता है जो आँखों से उसे सावन कहेंगे हम,
लिपटता है जो शानों से उसे दामन कहेंगे हम,
मुसलसल ही घिरा रहता है जिसकी याद से ये दिल,
गुज़रता है जो साँसों से उसे साजन कहेंगे हम.....
#उर्मिलामाधव,
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