ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 2 December 2025
हमने तौले हैं पंख
हमने तौले है पंख मुश्किल के,
अपनी ग़ैरत कहीं न झांकी है,
ज़िन्दगी भर के,ये ताजरिबे हैं
मुफ़्त में धूल किसने फांकी है...?
उर्मिला माधव..
3.12.2016
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