ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 14 December 2025
मुस्तफ़ा नहीं
मासूम दिल है तेरा पर बेवफ़ा नहीं
कोई भी ज़िंदगी का इक फ़लसफ़ा नहीं,
बाहर हिसार से हैं दुनिया की सारी खुशियां,
अब कुछ है तू हमारा पर मुसतफ़ा नहीं..
उर्मिला माधव
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