ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 20 December 2025
पहचानी नहीं जाती
ये दुनिया इस क़दर उलझी है पहचानी नहीं जाती,
अजब अहसास से लड़ती हूं हैरानी नहीं जाती,
अज़ल से ढूंढती फिरती हूं इक बेदाग़ सा दामन,
किसी सूरत भी इस दिल की ये वीरानी नहीं जाती..
उर्मिला माधव
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