ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 20 December 2025
मगरमच्छ
साथ मगरमच्छों के मुझको रहना है,
बैर भी इनका मेरे दिल को सहना है,
जीवन भर ......मैदान नहीं छोड़ा मैने,
अब क्या छोडूं,इतना ही तो कहना है......
उर्मिला माधव..
21.12.2016
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment