ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 5 December 2025
विसाल करते हैं
ज़ब्त करके कमाल करते हैं,
हम कहां अर्ज़ ए हाल करते हैं,
रू ब रू लहज़ा लहज़ा होते हुए
ग़म से ही फिर विसाल करते हैं..
उर्मिला माधव
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