ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 11 April 2025
साथ है तन्हाइयों का
साथ है तन्हाइयों का बस कोई शिकवा न डर,
फिर किन्हीं रुसवाइयों का क्यूं भला होता असर,
मुद्दतों जब आंधियों का साथ ही मिलता रहा,
किसकी हो परवाह मुझको मैं भली और मेरा घर,
उर्मिला माधव
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment