ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 12 June 2025
क़ीमती कहा
सर पर उढ़ाया शान से और ..क़ीमती कहा,
लगता था कुछ क़फ़न सा मगर चूनरी कहा,
इसको विदाई कहते हैं ....क्या ख़ूब रस्म है !!
मर्ग़-ए-बशर की रूह को .क्यूँ ज़िंदगी कहा ??
उर्मिला माधव..
12.6.2017
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