ये मेरे शेर और क़तआत ---
Wednesday, 4 June 2025
मोर की नाईं
कै मन में हूक उठ रई ऐ हवा में सोर की नाईं,
मगर चुपचाप बैठे हैं,सभा में चोर की नाईं,
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