ये मेरे शेर और क़तआत ---
Wednesday, 13 August 2025
दुनिया को देखते थे
दुनिया को देखते थे कभी मुस्कुरा के हम,
दुनिया ही देखती है हमें मुस्कुरा के अब,
उर्मिला माधव
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