Monday, 31 December 2018

सर्वज्ञ है

एक है ये मन ....सो स्थितप्रज्ञ है,
कर्म समिधा हैं ऑ जीवन यज्ञ है,
सब ही है अनुसार जीवन चक्र के,
सर्वथा अनुभूति भी .....सर्वग्य है..
उर्मिला माधव,
1.1.2018

ज़हमत उठाई आपने

मेरे दिल में आज ये नफ़रत जगाई .....आपने,
इस क़दर बेजा हर इक हरक़त दिखाई आपने,
मेरी हिम्मत तौलने को ...हर नफ़स तैयार सब,
इसलिए हर चंद हर ज़हमत उठाई ......आपने...
उर्मिला माधव...

Saturday, 29 December 2018

शक़्ल अब

किस-किसके हासिलात पै हलकान रहोगे,
बदरंग हो चुकी है ..ज़माने की शक्ल अब....
उर्मिला माधव....
30.12.2014....

जीता भी क्या

सांस भत्ते में मिली ....जद्दोजेह्द का बार भी,
इक गुज़ारेदार महंगी ज़िन्दगी जीता भी क्या...
उर्मिला माधव..
30.12.2016

Friday, 28 December 2018

लालसा

कोई लालसा हमको अब होती ही कब है,
वरना सब से खोद-खोद कर पूछा करते,
कैसे हो, क्या करते हो अब, अच्छे हो ना ?
ख़ामोशी पर सबकी, चुप-चुप रोया करते
उर्मिला माधव

Thursday, 27 December 2018

ताबानी

ना क़ायल है सितारों की मेरे चेहरे की ताबानी,
ग़म-ए-दौराँ में भी देखो तबस्सुम मेरा लासानी,
तलातुम चाहे जैसा हो,करेगा क्या उसे फानी..?
कि जिसने डूब कर देखा हो ये दरिया-ए-तूफ़ानी.....
उर्मिला माधव. 

शमा

अक्स उनका रात-दिन हलकान करता था हमें,
हम इधर मानिंद-ए-शम्मा हर नफ़स जलते रहे,
उर्मिला माधव...
28.12.2016

Wednesday, 26 December 2018

जन्नत दिखाएंगे

अब आपको ज़मीन पर ....जन्नत दिखाएँगे,
हम अपनी माँ के हाथ का एक ख़त दिखाएंगे...
उर्मिला माधव....
27.12.2014..

Sunday, 16 December 2018

देखा जाएगा

ठोकरों के बल पे मैंने सारी दुनियां नाप दी,
अब सुकूँ बाक़ी रहा सो वो भी देखा जाएगा..
उर्मिला माधव..
17.12.2016

Saturday, 15 December 2018

ख़राब नहीं

सिर्फ़ अपनों की बात करते हो,
दुनियां इतनी भी कुछ ख़राब नहीं..
उर्मिला माधव

Thursday, 13 December 2018

आया नहीं

जाते-जाते कह गया था,फिर मिलेंगे,
जो कभी फिर ..लौट कर आया नहीं...
उर्मिला माधव,
14.12.2016

कौन थे वो लोग जो

Kaun the wo log jo sab hanste gaate the yahan,
Ham to jab se aae hain Ik aag see dekhi hai bas

कौन थे वो लोग जो बस हंसते गाते थे यहां,
हम तो जब से आए हैं,इक आग सी देखी है बस,
उर्मिला माधव
14.12.2017

Wednesday, 12 December 2018

जगा कर देख

सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं......आकर देख,
जन जीवन की रीति यही है..अंतर्दृष्टि जगा कर देख,
जब साहस उत्तुंग हुआ तब...रीति-नीति का बिंदु कहाँ,
मार्ग सहज ही मिल जाता है,अपना पाँव बढ़ाकर देख,
उर्मिला माधव...
12.12 2017...

Sunday, 9 December 2018

ज़माने लगे

ग़म यूँ ही दुश्मनों को बताने लगे,
ये समझने में हमको ज़माने लगे,

हाल क्या है हमारा ये पूछा मगर,
दर्द सुन करके वो मुस्कुराने लगे,
उर्मिला माधव....
10.12.2014....

निकलते रहिये

दुनियां में गर जीना हो तो शोलों पर भी चलते रहिये,
सूरज की मानिंद हमेशा बस हर रोज़ निकलते रहिये..
उर्मिला माधव

Friday, 7 December 2018

कर न सके

मेरी नज़र का कोई एहतराम कर न सके,
अजब कमाल रहा एक काम कर न सके,

वक़ार मेरी मुहब्बत का पुर कुशादह है,
कमाल तुम हो के उठके सलाम कर न सके,
उर्मिला माधव..

Wednesday, 5 December 2018

हादसा है

ज़िन्दगी भी हर नफ़स इक हादसा है,
ये बता कितना सफ़र, बाक़ी बचा है ?
उर्मिला माधव
6.12.2017

Tuesday, 4 December 2018

ज़का

मुहब्बत को मीज़ान पर क्या रखोगे ?
ज़का से लक़ा तक तुली आ रही है,
उर्मिला माधव
5.12.2017
ज़का-बुद्धि
लक़ा-सूरत
मीज़ान-तराजू

दीवार सी हो जाएगी

हमने दीवारें चुनी हैं......ज़िन्दगी के वास्ते,
एक दिन ये ज़िन्दगी,दीवार सी हो जाएगी,

Hamne deewaren chuni hain zindagi ke waaste,
Ek din ye zindagi,deewar si ho jaegi.
उर्मिला माधव

Sunday, 2 December 2018

तुम्हारा हो गया

जिस्म-ओ-जां मेरे रहे लो दिल तुम्हारा हो गया,
बस तभी से,दिल बेचारा,ग़म का मारा हो गया,
जो मुहब्बत तुमसे थी,उसका कोई सानी नहीं,
मुंह घुमाकर क्या गए दिल,पारा-पारा हो गया..
उर्मिला माधव...
3.12.2016

समर्पण के लिए

बाध्य ही तो है हरेक प्राणी समर्पण के लिए,
फूल रख्खे जायेंगे हाथों में...अर्पण के लिए,
बस यही अंतिम क्रिया होती है गंगा घाट पर,
बन्धु,बांधव सब जमा होते हैं तर्पण के लिए.
उर्मिला माधव....
3.12.2014...

Wednesday, 28 November 2018

तूर जलना चाहिए

Aabpashi ke liye ................ek toor jalna chahiye,
Warna in aankhon ka dariya,kis taraf ko jaayega
.......................................................................
आबपाशी के लिए ............एक तूर जलना चाहिए,
वरना इन आँखों का दरिया,किस तरफ को जाएगा
उर्मिला माधव...
29.11.2015

पाश-पाश

ऐसे भी रंग लाता है अज़मत का आफताब,
पुरज़ोर है तबस्सुम,दिल ग़म से पाश-पाश ...
उर्मिला माधव....
29.11.2015

रहने भी दो जाओ

तक़ल्लुफ़ में पड़ो हो क्यों मियां........रहने भी दो जाओ,
बहे जाते है जो ख़ुद में ............उन्हें बहने भी दो जाओ,
कभी कुछ मसअले दुनियां में मुश्किल भी हैं समझे क्या ?
अगर तक़लीफ़ उनकी है ,......उन्हें सहने भी दो जाओ..
उर्मिला माधव,
29th november

Tuesday, 27 November 2018

मंसूब है

मेरी अपनी ज़िन्दग़ी मेरी नज़र में ख़ूब है,
इसलिए हर रंग मेरा ...मुझसे ही मंसूब है,
ग़ैर की नज़रों में गिरना और उठना बेसबब,
कोई भी दुश्मन नहीं और नईं कोई महबूब है....
उर्मिला माधव.

माई री

आज मैं तनहा बहुत घबराई री.....हे माई री,
याद मुझको इस क़दर क्यूँ आई री हे माई री??
तेरे दामन की जो यादें,छा गयीं दिल पर मेरे,
नींद बिलकुल होगई हरजाई री....हे माई  री..
उर्मिला माधव...
२८.११.२०१३.

Monday, 26 November 2018

याद नहीं आती है

jab ye jaanaa tujh tak ye fariyaad nahin jaati hai,
sach batlaaun,mujhko bhi ab yaad nahin aatii hai,
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जब से जाना तुझ तक ये फ़रियाद नहीं जाती है,
सच बतलाऊं,मुझको भी अब याद नहीं आती है,
उर्मिला माधव...
27.11.2015

झूठे लगते हैं

आपके लफ़्ज़ ..झूठे लगते हैं,
राहगीरों से .....लूटे लगते हैं,
इनमें पैगाम कुछ नहीं होता,
सर पै .पथ्थर से टूटे लगते हैं..
#उर्मिलामाधव,
27.11.2015

चल रहे हैं

आप आदत से अलहिदा चल रहे हैं,
हम अदावत से अलहिदा चल रहे हैं

अपनी आंखें को हथेली से छुपाके,
हर बग़ावत से अलहिदा चल रहे हैं..
उर्मिला माधव
27.11.2017

Sunday, 25 November 2018

आबलों के नाम

काँटों पे लिख रही हूँ अभी आबलों के नाम,
ख़ामोश मेरे दिल, न अभी कुछ सवाल कर,
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kaanton pe likh rahi hun abhii aablon ke naam,
khamosh mere dil, .....n abhi kuchh sawaal kar..
उर्मिला माधव..
26.11.2015

सब्र गया

हुजूम-ए-रंज की इफ़रात हुई सब्र गया,
सब्र जब टूट गया ख़्वाब तहे क़ब्र गया,
उर्मिला माधव
26.11.2016

रात की नहीं होती

पहले होती थी फ़िक़्र दुनियां की,
अब ...किसी बात की नहीं होती,
ज़िन्दगी ......जितनी है हमारी है,
दिन की ...या रात की नहीं होती...
उर्मिला माधव
26.11.2017

Saturday, 24 November 2018

मर जाएंगे

ग़ैर के क़दमों में झुकके बा अदब फ़र्शी सलाम ?
तौबा-तौबा कुफ़्र है,      हम तो वहीं मर जायेंगे,
उर्मिला माधव
25.11.2018

Tuesday, 20 November 2018

दिल्लगी अच्छी नहीं

Kyun hawa dete ho aakhir jangalon ki aag ko,
Jalane walon se kabhi bhi,dillagi achhii nahin..

क्यों हवा देते हो आख़िर जंगलों की आग को,
जलने वालों से कभी भी दिल्लगी अच्छी नहीं,
उर्मिला माधव,
21.11.2017

Sunday, 18 November 2018

कैफियत

ज़िन्दगानी-ए-शरीयत.....ख़ैरियत रखती नहीं,
कौनसी हस्ती है जो कुछ क़ैफ़ियत रखती नहीं,
क्यूँ किसीको हम मसीहा मान कर सजदा करें,
हिम्मत-ए-इंन्साँ सबाब-ए- हैसियत रखती नहीं.
उर्मिला माधव
१८.११.२०१३

Saturday, 17 November 2018

जंजीर है

जो तुम्हारी ख़ास एक तस्वीर है,
वो मेरे दिल की अजब ज़ंजीर है,

jo tumhari khaas ek tasviir hai,
wo mere dil kiajab zanjeer hai,

वो मुझे अपनी सी लगती है सुनो,
उसकी सीरत इन्तेहाई शीर है,

wo mujhe apnii sii lagti hai suno,
uski siirat intehaaii sheer hai,

बिन तुम्हारे दिल बहुत बेचैन था,
ये महज़ बिछड़े दिनों की पीर है,

bin tumhare dil bahut bechain tha,
ye mahaz bichhde dinon kii peer hai,

रात दिन बाबत तुम्हारे सोचना,
क्यूँ मेरे दिल पै रखी शमशीर है,

raat-din baabat tumhare sochna,
kyun mere dil pe rakhi shamsheer hai,

लौट कर आना तो उनको है नहीं,
तयशुदा है बस यही तक़दीर है,...

laut kar aanaa to unko hai nahin,
Tayshuda hai bs yahi taqdeer hai..
उर्मिला माधव...
18.11.2015

Friday, 16 November 2018

मेरी आरज़ू

तेरा ही ख्वाब तेरी तलब तेरी जुस्तजू,
तेरा क़रम हो तेरी नज़र तू ही रू-ब-रू,
दर तेरा चौखट तेरी मन्ज़र हो ख़ू-ब-रू,
मैं तुझसे मिल सकूँ है यही मेरी आरज़ू....  उर्मिला माधव..

गवाही में...

तग़य्युर से हूँ वाबस्ता,.....हक़ीक़त तो यही है पर,
मैं किसको साथ लाऊं अब बताओ इस गवाही में....
उर्मिला माधव..
17.11.2016
तग़य्युर... change बदलाव

Wednesday, 14 November 2018

कसम मैं

कमज़ोर पड़ रही है,रिश्तों की पायदारी,
दुश्मन कहीं छुपा है कोई तुम में और हम में,
ये ज़िन्दगी किसीकी कब मिलकियत हुई है,
रख्खा नहीं है कुछ भी इन वादा-ऑ-कसम में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

दिल ही थका जाता है

पाँव थकते तो अजब क्या था,नई बात न थी,
कितनी हैरत है यहां दिल ही थका जाता है..

Paanv thakte to ajab kya tha naii baat na thi,
Kitni hairat hai yahan,dil hi thaka jata hai..
उर्मिला माधव
15.11.2017

Monday, 12 November 2018

मुक़ाबिल आगया

जिसको देखो वो मुक़ाबिल आ गया,
मुश्किलों पर मेरा भी दिल आ गया,

मैंने सोचा हाथ से जाने भी क्यों दूं ,
इतने नेज़ों बीच बिस्मिल आ गया,

इस तखैय्युल में बुराई क्या है बोलो,
आँख बस मूंदी के साहिल आ गया,
उर्मिला माधव...
13.11.2014...

पटाखा क्या करें

बैठ कर अपने दिए ....देखा किये,
हम दिवाली और पटाखा क्या करें ...
उर्मिला माधव...
13.11.2015..

आश्नां है

किस क़दर इंसान इससे आश्नां है,
ये जो दुनियां है,फ़क़त तश्ना दहां है,
फिर भी चलना है तो चल इस तरह
यूँ अकेला है,मगर इक कारवां है..
उर्मिला माधव

मीर, ग़ालिब, दाग़ मोमिन

😊😊😊

मीर,ग़ालिब,दाग़,मोमिन,चार बैठे थे जहाँ,
क्या बताएं,हम हक़ीरों ने भी कीं गुस्ताखियाँ,

भूल से इक लफ्ज़ भी पाई न उनसे दाद कुछ,
बस करम इतना रहा के,सबकी खींचीं खुश्कियां..
उर्मिला माधव...
13.11.2015

मौजिज़ह है

कारसाज़ी उसकी,उसका मौजिजः है,
ज़िन्दगी है ख़ैरियत से कम नहीं कुछ,

Karsazi uski ......uska maujizah hai ,
Zindagi hai khairiyat se,kam nahin kuchh..
उर्मिला माधव,
13.11.2017
मौजिज:--- चमत्कार

Sunday, 11 November 2018

लेंगे हम

कितनी सारी बंदिशें हैं.....तुमको पाने में सनम,
तुम नहीं मिल पाए तो .फिर सांस कैसे लेंगे हम??
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Kitni saari bandishen hain tumko paane main sanam,
tum nahin mil paaye to phir saans kaise lenge hum...?
उर्मिला माधव...
12.11.2013.

तो क्या होता

अगर कोई मस्लहत पेश-ए-जहाँ होती तो क्या होता,
मेरी ये ज़िन्दगी तुझमें ......निहां होती तो क्या होता,
उर्मिला माधव...
12.11.2014...

आज तक

ज़िन्दगी में टूटना ही टूटना देखा है हमने आज तक,
या ख़ुशी का रूठना ही रूठना देखा है हमने आज तक,
अब हमें मिलना ही क्या है,जो करें शिकवा कोई हम,
साथ सबका छूटना ही छूटना देखा है हमने आज तक ...
उर्मिला माधव...
१२.११.२०१३...

Friday, 9 November 2018

ज़रूर

हम उम्र भर तकेंगे तेरी राह हमनवा,
झोंका हवा का कोई तो आना ही है ज़रूर ....
उर्मिला माधव...
10.11.2014...

दिलबर मेरा

संग दिल संग सनम तू नहीं दिलबर मेरा,
संगेमरमर ही सही दर भी है पत्थर तेरा ........
उर्मिला माधव...
10.11.2014......

सवाली है

आज ये दिल बहुत सवाली है,
किसलिए रात इतनी काली है,

उन चरागों में रौशनी ही नहीं,
जिनकी रंगत महज़ दीवाली है,

ज़िन्दगी इस तरह बनाली है

जानते हैं

मुश्किलों से दिल लगाना जानते है,
लब हमारे.....मुसकुराना जानते हैं,

ज़िंदगी ज़िन्दादिली का नाम है पर,
बेख़ुदी क्या है.....बताना जानते हैं,

राह चलने का हुनर मालूम है अब,
आग से दामन बचाना....जानते हैं,
उर्मिला माधव...
10.11.2016

बशर है ही नहीं

तू मुसलमां है मुझे ये तो ख़बर है ही नहीं,
इतने हिस्सों में अगर है तो बशर है ही नहीं,

Tu musalmaaN hai mujhe ye to khabar hai hi nahiN,
Itne hissoN me agar hai to bashar hai hi nahiN.
Urmila Madhav

उसलूब है

आंख में काजल नहीं और मांग में सुर्ख़ी नहीं,
पर मुहब्बत का मुझे मालूम हर उसलूब है,

Aankh me kajal nahin or maang me surkhii nahiN,
Par muhabbat ka mujhe maaloom har usloob hai.
Urmila Madhav.

Thursday, 8 November 2018

मंसूब है

वो मेरी सूरत पे बोले ख़ूब है,
हर कोई बस हुस्न से मंसूब है,

क़द्रदां सीरत का भी है कोई तो
क्या बताऊँ,कौन वो महबूब है...
उर्मिला माधव
9.11.2016

Wednesday, 7 November 2018

तेरे मेरे में रहे

हम हमेशा दर्द के............भरपूर घेरे मैं रहे,
वो दग़ा करते रहे और.......हम अँधेरे में रहे,
उनके दिलने गैर को पुरज़ोर"सुन्दरतम"कहा,
हम ही कुछ न कह सके...बस तेरे-मेरे में रहे,
उर्मिला माधव..
7.11.2013

आवारगी इक शख़्स की

क़त्ल अपने दिल का हमने अपने हाथों कर दिया,
दिल को जब भाई नहीं,आवारगी एक शख़्स की...
उर्मिला माधव...
8.11.2016

ताकती है

ज़िन्दगी को रोक कर हम मुत्मइन हैं
मौत मुड़कर रहगुज़र को ताकती है,
उर्मिला माधव
8.11.2017

ज़िन्दगी को

ज़िन्दगी को इस तरह उसने लिखा है
हर वरक खुल कर गवाही दे रहा है..
उर्मिला माधव

Sunday, 4 November 2018

हो जाएगा

था हमें मालूम.........कोई हादसा हो जाएगा,
ये नहीं मालूम था......इतना बुरा हो जायेगा,
दिल के टुकड़े हाथ में लेकर फिरेंगे जा-ब-जा,
जो भी हम लिखेंगे वो सब,फातिहा हो जायेगा...
उर्मिला माधव...
5.11.2014...

दोबाला कर दिया

हम बुलाते रह गये वो चल दिया मुह मोड़ कर,
उसकी हरकत ने हमारा गम दोबाला कर दिया...
ःः
Ham bulaate rah gaye wo chal diya munh mod kar,
,Uski harqat ne hamara gam dobala kar diya ....
Urmila Madhav.
5.11.2016

फ़र्क़ क्या

तुम कभी आओ न आओ फ़र्क़ क्या,
उम्र भर तो दूर ही रहना लिखा है,
उर्मिला माधव,
5.11.2017

देखा चाहिए

दर्द से दामन भरा हो और फिर क्या चाहिए,
बस जगह ख़ाली न हो इतना ही देखा चाहिए

थका दीजो

Zindagi is qadar thakaa deejo,
Tere karne ko kuchh na rah jaaye.

ज़िंदगी इस क़दर थका दीजो,
तेरे करने को कुछ न रह जाये,
उर्मिला माधव..

और क्या होगा

अभी पहली ही दुनियां में क़दम रखना नहीं आया
तो फिर अब दूसरी दुनियां बना कर और क्या होगा ?
उर्मिला माधव

साहिल नहीं होता

कोई इश्क-ओ-मुहब्बत में महे क़ामिल नहीं होता
ये वो रुतबा है जो हर शख़्स को हासिल नहीं होता,
बहुत गहराई है देखो जुनून-ए-इश्क में जाकर,
समन्दर ही समन्दर है यहाँ साहिल नहीं होता.....
Urmila Madhav....

Saturday, 3 November 2018

झुठला दिया

Zindagi ne raushni ka falsafa jhuthla diya,
Teergi me jugnuon ki bheed badhti dekh kar,

ज़िंदगी ने रौशनी का फ़लसफ़ा झुठला दिया,
तीरगी में जुगनुओं की भीड़ बढ़ती देख कर..

Urmila Madhav

हम खड़े हैं

कितने भंवर लपेटे,मुश्किल में हम खड़े हैं,
हिम्मत नहीं है जिनमें साहिल पे ही पड़े हैं,
उर्मिला माधव...
4.11.2015

Thursday, 1 November 2018

बादशाह थे

हम आसतीं चढ़ा के उन्हें देखते रहे,
सांपों के झुंड में जो कभी बादशाह थे,
उर्मिला माधव

Monday, 29 October 2018

लड़ती फिरूँ

मैं समंदर से,हवा से,किसलिए लड़ती फिरूँ
जब मुझे अहसास है तू साथ तो देगा नहीं...
उर्मिला माधव
30.10.2015

ग़ुरूर है

ज़रा ..होश में आ जाइये,
इनसान जी ..ये फितूर है,
जो तुम करो वो अना हुई ?
जो हम करें ..वो ग़ुरूर है ?
उर्मिला माधव..
28.9.2016

आवारगी

क़त्ल अपने दिल का हमने अपने हाथों कर दिया,
दिल को जब भाई नहीं,आवारगी एक शख़्स की...
उर्मिला माधव...
8.11.2016

बेख़ुदी के दायरे

बेखुदी के दायरों से कुछ निकल कर बात कर,
ज़ख्म बातों का नहीं भरता,संभल कर बात कर....
उर्मिला माधव...
9.11.2016

याद उसकी आई है

किस क़दर तनहाई है और याद उसकी आई है,
पर सलाम-ए-सुब्ह सबको ...रूह से पहुंचाई है...
उर्मिला माधव..
16.11.2016

क्या-क्या चाहिए

आसमां कहता है ? ज़र्रा चाहिए ?
और दिल से पूछ क्या-क्या चाहिए ?

मुझपे ज़ाहिर है तेरा जुगराफिया,
आईना तुझको भी देखा चाहिए..,
उर्मिला माधव,
16.11.2016

गवाही में

तग़य्युर से हूँ वाबस्ता,.....हक़ीक़त तो यही है पर,
मैं किसको साथ लाऊं अब बताओ इस गवाही में....
उर्मिला माधव..
17.11.2016
तग़य्युर... change बदलाव

Saturday, 27 October 2018

उसे रहने दो

एक मतला---

jo iztarab-e-musalsal he usey rahne do,
paanv se sar se jo ghayal hai usey rahne do,
::
जो इज़्तराब -ए-मुसलसल है उसे रहने दो,
पाँव से,सर से जो घायल है...उसे रहने दो....
#उर्मिलामाधव..
28.10.2015

Thursday, 25 October 2018

आदमी की ज़ात

जो गुलामों की तलब रखता हो, वो,
क्या करेगा ....आदमी की ज़ात का...????
उर्मिला माधव..
26.10.2016

गुलाब देदेंगे

चाँद तारों के ख़्वाब देदेंगे...........जितने चाहो गुलाब देदेंगे,
इतनी गफ़लत में बस नहीं रहना,उम्र भर का हिसाब देदेंगे
उर्मिला माधव
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Wednesday, 24 October 2018

हुज्जूम था

सभी बेशकीमती दोस्तों के प्यार की बहुत ममनून हूँ ,
माज़रत चाहती हूँ---फ़र्दन-फ़र्दन शुक्रिया अदा नहीं कर पा रही हूँ...
इनबॉक्स में विश करने वाले सभी दोस्तों का बहुत शुक्रिया...
<3 <3 <3

जिस समय पैदा हुए ......हम को कहाँ मालूम था,
बेश क़ीमत प्यार से दिल किस क़दर महरूम था,
प्यारे-प्यारे दोस्तों के ......प्यार से काफ़ूर है अब,
रंज-ओ-ग़म का साथ मेरे ..वो जो एक हुज्जूम था.....
::::::
jis samay paida hue,hamko kahan maloom tha,
Besh qimat pyar se dil kis qadar mahroom tha,
Pyare-pyare doston ke....... pyar se kafoor hai,
Ranj-o-gham ka sath mere wo jo ik hujjoom tha...
Urmila Madhav....
25.10.2015

छंद

ज़िन्दगी अपनी बहुत वीरान है,
दर्द से लिख्खा गया दीवान है,
रोज़ लिखते और मिटाते हैं इसे,
ग़ैर को हम कब दिखाते हैं इसे,
उर्मिला माधव

Tuesday, 23 October 2018

लड़ा करते हैं हम

आशिक़ी की शक़्ल में ....दुश्मन खड़ा करते हैं हम,
ख़ुद को छोटा करके उसका क़द बड़ा करते हैं हम,
जिसकी चाहत में मुक़ाबिल ...रंजो ग़म का बोझ हो,
सारी दुनियां भूल कर,....ख़ुद से लड़ा करते हैं हम..
उर्मिला माधव,
24.10.2017

मुस्तक़बिल

चलते रहते हैं ज़िन्दा दिल,चाहे जितनी हो मुश्किल,
कितनी दूरी तय करनी है,ज़ाहिर तो हो मुस्तक़बिल,
उर्मिला माधव...
मुस्तक़बिल--- भविष्य

हैरत से

चेहरे को हाथों पर रख कर देखा उसको हैरत से,
कैसे उसने दिल को तोड़ा और भट्टी में झोंक दिया,
उर्मिला माधव

Monday, 22 October 2018

दरकिनार करके

तंग आ चुके हैं,हम भी अब इंतज़ार करके,
मिलने को आ गए हैं सब दरकिनार करके,

Tang aa chuke thain ham bhi ab intzaar karke,
milne ko aa gaye hain,......sab darkinaar karke,

उर्मिला माधव...
23.10.2016

Sunday, 21 October 2018

और क्या होगा

अभी पहली ही दुनियां में ..क़दम रखना नहीं आया
तो फिर अब दूसरी दुनियां बना कर और क्या होगा ?

Abhi pahli hii duniyan me qadam rakhna nahin aayaa,
To phir ab dusri duniyan banaa kar or kya hoga ?

Urmila Madhav

Saturday, 20 October 2018

ढोया किये

दिल ने एक दिन बाख़ुदा ईमान तौला आपका,
उम्र भर ..अफ़सुर्दगी का बार हम ढोया किये..
उर्मिला माधव...
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dil ne ek din bakhudaa ....iiman taula aapka,
Umr bhar afsurdagi ka baar ham dhoya kiye,....
Urmila Madhav
21.10.2017

शनासाई न थी

एक तो गहरी .........शनासाई न थी,
जो भी थी वो हमने  दिखलाई न थी,
हमने अपने दायरे ........कायम रखे,
हां मगर .......मंशा ये बतलाई न थी...
उर्मिला माधव
21.10.2017

Friday, 19 October 2018

कर दिया रब ने

hamko khamosh kar diya rab ne ,
dil k daman ko bhar diya rab ne,
ab wo aansu the ya ki chhale the,
jo bhi ho kuchh nazar kiya rab ne,
Urmila Madhav...

इंतिहा कहाँ होगी

ज़ब्त की इंतेहा .....कहाँ होगी ?
हमने मरते हुए भी आह न की..
उर्मिला माधव
20.10.2017

नहीं देखा

उसने मुंह मोड़ कर नहीं देखा,
जब तलक हमने मुंह न फेर लिया...

Usne munh mod kar nahin dekha,
Jb talak hamne munh na pher liya
उर्मिला माधव

Wednesday, 17 October 2018

मुश्किल हो गया

अमृता प्रीतम,हज़ारों और कुछ परवीन शाकिर,
इक सह्ल किरदार मिलना ख़ास मुश्किल होगया
उर्मिला माधव

घबराया हुआ दिल

रब से लड़ना चाहता है,कबसे घबराया हुआ दिल,
ख़ुद में रहना चाहता है सबसे घबराया हुआ दिल
उर्मिला माधव
18.10.2017

इशारा

हजारों लफ्ज़ से बढ़कर इशारा दिल का होता है,
यही वो रंग है के जो दिल-ए-बिस्मिल का होता है...

Hazaron lafz se badhkar ishara dil ka hota hai,
Yahi wo rang hai ke jo dil-e-bismil ka hota hai ..

उर्मिला माधव...

Tuesday, 16 October 2018

पत्थर हूं मैं

सबने ये समझा के एक पत्थर हूँ मैं,
चूंकि  देखा ही नहीं रोते हुए...
उर्मिला माधव....
17.10.2017...

क्या ज़रूरत थी

इन फ़रेबों की .........क्या ज़रूरत थी,
जो भी करना था यूँ ही कर लिया होता
उर्मिला माधव
16.10.2015

बोसा

शर्म-ओ-हया के नाम पे,आंखों को ढक लिया,
बोसे की ख़्वाहिशों में मगर ......लब खुले रहे..

Sharm-o-haya ke naam pe aankhon ko dhak liya,
Bose ki khwahishon me magar lab khule rahe..
उर्मिला माधव..
16.10.2017

Saturday, 13 October 2018

महबूब है

मैंने कब तुझसे कहा के ......तू मेरा महबूब है
सिर्फ़ इतना ही कहा ........तू देखने में ख़ूब है
जिसने सारी ज़िन्दगी. ...वीरानियों में काट दी
तू नहीं समझेगा उसका दिल महज़ मज्जूब है
#उर्मिलामाधव
14.10.2017

Thursday, 11 October 2018

हो नहीं सकती

ज़मीं की भी तलहटी इतनी नीची हो नहीं सकती,
फ़क़त इंसान की ग़ैरत ही मुंह के बल भी गिरती है....
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zamiin kii bhii talahtii itnii neechii ho nahiin saktii,
faqat insaan kii gairat hii munh ke bal bhii girtii hai..
#उर्मिलामाधव...
2.10.2015

हस्सास होती है बहुत

शायराना शख़्सियत, ....हस्सास होती है बहुत,
उसकी सारी ज़िंदगी ही .....ख़ास होती है बहुत,
ये शरफ़ हासिल है उसको,ग़म कहे अल्फ़ाज़ में
जो भी है तक़लीफ़ दिल के पास होती है बहुत…
उर्मिला माधव
11.10.2018

Wednesday, 10 October 2018

कश्ती उतारी होती

चढ़ते तूफ़ाँ में कभी ......क़श्ती उतारी होती,
ख़ूब तबियत से वहीं ......शाम गुज़ारी होती,
जो कहीं हद से गुज़र जाता अगर जोशे जुनूँ,
हम फ़ना होते मगर .......बात तुम्हारी होती..

chadhte toofaan main kabhii qashtii utaarii hotii,
khoob tabiyat se wahin ......shaam guzaari hotii,
jo kahiin had se guzar jaataa agar joshe junoon,
ham fanaa hote magar .......baat tumhaarii hotii
Urmila Madhav
उर्मिला माधव....
11.10.2016

किरदार है अब

लम्स के रिश्तों का ..कारोबार है अब,
इल्म का कमज़ोर सा किरदार है अब,

Lams ke rishton ka karobaar hai ab,
Ilm ka ......kamzor saa kirdar hai ab,
Urmila Madhav

Tuesday, 9 October 2018

उड़ते हुए देखा

ज़माने को समझने में हमें क्या देर लगनी थी,
जब हमने सादगी की ख़ाक को उड़ते हुए देखा..
उर्मिला माधव
10.10.2018

ख़ुशबू नहीं आती

एक शेर--उन्वान
ख़ुशबू..

वो जो ख़त तुमने भेजे थे कभी ख़ुश्बू से तर करके,
किसी भी ढंग से खोलूं,......मगर ख़ुश्बू नहीं आती..
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Wo jo khat tumne bheje the kabhi khushbu se tar karke,
Kisi bhi dhang se kholun,magar khushbuu nahin aatii...
#उर्मिलामाधव
10.10.2015..

रहती है

मेरे सर पे सवार रहती है,
बेख़ुदी बेशुमार रहती है,

तीरगी तेरा अदा तेरी रमज़,
जिस्म के आर-पार रहती है,
उर्मिला माधव

लत है

बस उसको याद करना,ये रोज़ की सी लत है,
कोशिश हज़ार कर लें, क्या लत भी छूटती है ??
उर्मिला माधव
9.10.2018..

नुमायां हो गया

आपने अपनी हदों से गिरके जो कुछ कर दिया,
आपका ज़ह्र-ए-जेह्न खुल कर नुमायां हो गया..
उर्मिला माधव

इतरा गया

सबसे पहली बात..........तूने आसमां देखा नहीं,
अपने क़द पे खुद-ब-खुद ही बे-सबब इतरा गया...
उर्मिला माधव...
10.10.2014..

Monday, 8 October 2018

देता रहा।

हर कोई एक दूसरे को ..........लानतें देता रहा,
और वतन की शान में ....कुछ गुरबतें बोता रहा,
उसकी बकरी मेरी घोड़ी,मेरी ज़्यादा,तेरी थोड़ी,
अपनी ग़ैरत से भी नीचे,गिर गया......रोता रहा...
उर्मिला माधव...
9.10.2015

टीप लेते हैं

😕😕😕😕😕😕😳

चोरों से .......दोस्ती नहीं करना,
सारे अशआर ........टीप लेते हैं,
एक भी लफ़्ज़ लिख नहीं सकते,
उस पे .महफ़िल में चीख लेते हैं
उर्मिला माधव

Sunday, 7 October 2018

हिफ़ाज़त की

मैंने तो उम्र भर ....इबादत की,
उसने तौहीन की ..मुहब्बत की
ये जो अन्दर .तड़प सी रहती है,
बस उसी दर्द की हिफाज़त की....
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maine to umr bhar ibaadat kii,
usne tauhiin kii muhabbat kii,
ye jo andar tadap sii rahti hai,
bas ....usii dard kii hifazat kii....
#उर्मिलामाधव...
8.10.2015

शामिल नहीं

हमने जो कुछ भी लिखा है इक तख्खईयुल है महज़
इसमें हरगिज़ शख्सियत कोई ...दूसरी शामिल नहीं...
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hamne jo kuchh bhii likha hai ik takhkhaiul hai mahaz,
ismen hargiz shakhsiyat ..........koi dusrii shamil nahin....
उर्मिला माधव...
8.10.2016

Saturday, 6 October 2018

मआनी है

सारा दारोमदार है तुम पर
ये समझना तो बे-मआनी है

तुम समझते हो हम ही नादाँ है?
दिल तजुर्बों की राजधानी है
उर्मिला माधव

दस्तार में

Jitne zyadah pech rakhkhoge miyaaN dastar me,
Utna zyadah talkh lahja aayega,guftar me

जितने ज़्यादः पेच रख्खोगे मियां दस्तार में,
उतना ज़्यादः तल्ख़ लहजा आएगा,गुफ़्तार में

Urmila Madhav.

नहीं कहते

वैसे तो सिर्फ़ झूठ कहते हो,
सच भी सौ फ़ीसदी नहीं कहते
उर्मिला माधव

Friday, 5 October 2018

संभल जाए

दिले नादान से कह दो कि ये संभल जाए,
इससे पहले कि ये दस्तार भी उछल जाए,
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Dile nadan se kahdo ki ye sanbhal jaaye
Sare bazaar na dastaar bhi uchhal jaaye...
Urmila Madhav..
6.10.2013

है ही नहीं

इक है दोपहर बिन परिंदों की,
इसमें आवाज़ कोई है ही नहीं,
ऐसी दुनियां में अब रिहाइश है,
जिसका अंदाज़ कोई है ही नही,
उर्मिला माधव

सुहानी है

किससे,कितनी,कहाँ निभानी है,
फ़िक़्र क्या,ज़ीस्त आनी-जानी है,
ये तो रिश्ते हैं, ...ग़म गुसारी के,
इसमें दुनियां ...कहाँ सुहानी है?
उर्मिला माधव
6.10.2015

कोई भी हो

फ़त्ह की बुनियाद है.....बस मौत ही
ज़ात, मज़हब और वतन कोई भी हो....
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fath kii buniyad hai bas maut hii
Zaat,mazhab or vatan koii.bhii ho...
उर्मिला माधव...
6.10.2016..

नींद सी आने लगी

लगता है माहौल बिगड़ा जा रहा है
क्योंकि अब कुछ नींद सी आने लगी
उर्मिला माधव,
6.10.2017

Thursday, 4 October 2018

तक़दीर दे डोगे ..

अगर तुम आ ही जाओगे तो क्या जागीर देदोगे ?
बहुत होगा तो ये होगा,......कोई तहरीर दे दोगे
अगर बरसात सब लिख्खी हुई तहरीर धो दे तो ?
सुनहरे लफ़्ज़ में लिख कर,मुझे तक़दीर दे दोगे ?
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Agar tum aa hii jaaoge to kya jageer dedoge?
Bahut hoga to ye hoga koi tehreer dedoge,
Agar barsat sab likhkhi hui tehreer dho de to,?
Sunhare lafz men likhkar mujhe taqdeer dedoge ?
उर्मिला माधव...
5.10.2016

छुड़ाना है

मौत से जान को छुड़ाना है,
फिर भी एक बार मुंह लगाना है,
उर्मिला माधव,
5.10.2017

आज़माते हैं

ज़िन्दगी कब तलक मुअय्यन है,
लोग ....रह-रह के आज़माते हैं,

जिसकी बुनियाद ही नहीं कुछ भी,
उस पे सब ......अटकलें लगाते हैं,

Zindagi kab talak muayyan hai,
Log rah-rah ke aazmate hain,

Jiski buniyad hi nahin kuchh bhi
Us pe sab atkalen lagaate hain,

Urmila Madhav
5.10.2017

Wednesday, 3 October 2018

ज़रूरी भी नहीं

उम्र भर का साथ हो, इतना ज़रूरी भी नहीं,
ज़िंदगी दरअस्ल तनहा ही भली लगती है अब...
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umr bhar ka sath ho itnaa zaruurii bhii nahin,
zindagi darasl ......tanha hii bhalii lagtii hai ab....
उर्मिला माधव...
4.10.2015

बे-कौल-ओ-कसम भी

दुश्मन भी समझते है कहते हैं सनम भी,
हम लोग वफादार हैं बे-कौल-ओ-कसम भी..
#उर्मिलामाधव...
4.10.2015

मेरी राह पे न चलना

Inspired...

मेरा दर्द पढ़ने वाले..... मेरी राह पे न चलना,
ये हक़ीक़तें समझना, मेरे आबले भी गिनना,
उर्मिला माधव
2.10.2018
आबले--- छाले

Sunday, 30 September 2018

हाल है

दिल शब्-ए-ग़म से शिक़स्ता हाल है,
ज़िन्दगी कितनी बची है क्या खबर ??....
उर्मिला माधव...
1.10.2014...

बार-बार

कुछ इस तरह लगी कि हुई दिल के आर-पार,
जब ज़ख्म है तो दर्द भी.....होगा ही बार-बार...
उर्मिला माधव...
1.9.2015

चला गया

मैं रास्ते की ख़ाक का हिस्सा बनी रही,
आंखों में धूल झोंक के ,राही चला गया
उर्मिला माधव
1.10.2017

Saturday, 29 September 2018

जाने दो

मौत बस आख़री तमाशा है,
नब्ज़ बाक़ी है छूट जाने दो,
उर्मिला माधव

Friday, 28 September 2018

मिट जाएंगे

बेटियों की खातिर....

दुख्तर-ए-जज़्बात हूँ कुछ उन्सियत रख्खो ज़रा,
वरना इस दुनियां के सारे.....रास्ते मिट जायेंगे.....
उर्मिला माधव....
29.9.2014....

दुख्तर---- बेटी
जज़्बात---भावनाएं
उन्सियत---हमदर्दी

कमाल करते हैं

शर्म ..बाक़ी नहीं बची है यहां,
लोग खुल के कमाल करते हैं,
जिसको,जैसी जहां ज़रूरत है,
उसका बस..इस्तेमाल करते हैं...
उर्मिला माधव,
29.9.2017

हिंदी क़ता--सृष्टि में

सब परिधियाँ अर्थ अपने खो चुकी हैं सृष्टि में,
अब रहा संसार .......सो है शून्य मेरी दृष्टि में,
कौन गणनाएँ करे आघात ऑर प्रतिघात की,
चेष्टाएँ सब उपेक्षित .....पीर की अतिवृष्टि में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

है ज़ुरूर

आपकी सूरत हंसीं तो है .….ज़ुरूर,
उसके ऊपर सिर्फ़ लिख्खा है ग़ुरूर,
इसको पढ़के यूँ समझ लो, जानेमन,
जा चुके हैं उम्र भर को .....तुमसे दूर
उर्मिला माधव

Thursday, 27 September 2018

क्या करता होगा

याद बहुत ही आने वाला,
ना जाने क्या करता होगा,

नौ बज कर सैंतालिस तक तो
मैंने उसको जगते देखा,
उससे ज़्यादा जगने पर फिर,
घर वालों से डरता होगा..

क्या-क्या करता होगा घर में
शायद पढ़ता-लिखता होगा
उसके कपड़े और किताबें,
सब हर रोज़ बिखरता होगा,

या फिर याद किसीको करके
ठंडी आहें भरता होगा
उर्मिला माधव

उठा के ले जाएं

हम तो कुछ देर और बैठेंगे,
आप महफ़िल उठाके लेजाएँ,

हम तो अशआर नज़्र करते हैं
आप बस दिल बचाके ले जाएं

हम तो राही हैं उम्र भर वाले,
आप मंज़िल हटा के ले जाएँ

अब सफ़ीने के पांव जमने लगे,
आप साहिल घुमा के ले जाएं

ख़ून का रंग जम गया है मगर,
आप क़ातिल छुपा के ले जाएं,
उर्मिला माधव