शर्म ..बाक़ी नहीं बची है यहां, लोग खुल के कमाल करते हैं, जिसको,जैसी जहां ज़रूरत है, उसका बस..इस्तेमाल करते हैं... उर्मिला माधव, 29.9.2017
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