सब यहीे समझे ......के सोते रह गए, हम मगर ......तकिये भिगोते रह गए, दिल जिगर पै इतने ज़्यादः ज़ख्म थे, ख़ून के धब्बे ही ..........धोते रह गए.. #उर्मिलामाधव 25.9.2015
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