दिल अपना हमको ज़ोर-ओ-ज़बर तोड़ना पड़ा, मुंह तुझसे हमको ...अहले नज़र, मोड़ना पड़ा हर रोज़ मर रहे थे ......बहोत सोच -सोच कर, चाहत को अपनी .वक़्त-ए-सफ़र छोड़ना पड़ा, उर्मिला माधव.. 8.9.2016
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