Monday, 3 September 2018

ज़माने वाले

थक के रो जाते हैं .....किरदार निभाने वाले,
इस क़दर दाग़ लगाते हैं .........ज़माने वाले,
करना पड़ता है कभी ज़ब्त सरे महफ़िल भी,
सारे अफ़साने ..........नहीं होते सुनाने वाले....
उर्मिला माधव...
4.9.2015...

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