बिन दर-ओ-दीवार का घर,उसपै ये दुनियां का डर, हर तरफ शोलों की बारिश और मेरा तनहा सफ़र,
साथ कोई हो भी ग़र तो उसके क्या मानी हुए ? क़ुदरतन ही बंट गये ये मेरा घर ये उसका घर, उर्मिला माधव 22.9.2015
No comments:
Post a Comment