ज़िन्दगी कब-कब रही है मोतबर, एक पल हाज़िर है,इक पल ख़ाक पर
ये तो कारीगर की ही मर्ज़ी है बस, जब तलक चाहे घुमाए चाक पर उर्मिला माधव
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