हम तो कुछ देर और बैठेंगे,
आप महफ़िल उठाके लेजाएँ,
हम तो अशआर नज़्र करते हैं
आप बस दिल बचाके ले जाएं
हम तो राही हैं उम्र भर वाले,
आप मंज़िल हटा के ले जाएँ
अब सफ़ीने के पांव जमने लगे,
आप साहिल घुमा के ले जाएं
ख़ून का रंग जम गया है मगर,
आप क़ातिल छुपा के ले जाएं,
उर्मिला माधव
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