ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 6 September 2018
मनाने आए हैं
नींद गर आ जाए तो फ़िर कौन आता है अभी,
हम तो अपनी नींद का मातम मनाने आए हैं
उर्मिला माधव
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