अभी इतिहास के पिछले सुफहे पूरे नहीं भूले, नई एक इब्तेदा की आज फिर पहली कड़ी है, ज़रूरत क्या कसौटी पर अकेले हम खरे उतरें, करें क्यों मश्क आख़िर ज़िन्दगी कितनी बड़ी है ? उर्मिला माधव, 13.9.2016
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