तेरा ही ख्वाब तेरी तलब तेरी जुस्तजू, तेरा क़रम हो तेरी नज़र तू ही रू-ब-रू, दर तेरा चौखट तेरी मन्ज़र हो ख़ू-ब-रू, मैं तुझसे मिल सकूँ है यही मेरी आरज़ू.... उर्मिला माधव..
No comments:
Post a Comment