ज़िन्दगानी-ए-शरीयत.....ख़ैरियत रखती नहीं, कौनसी हस्ती है जो कुछ क़ैफ़ियत रखती नहीं, क्यूँ किसीको हम मसीहा मान कर सजदा करें, हिम्मत-ए-इंन्साँ सबाब-ए- हैसियत रखती नहीं. उर्मिला माधव १८.११.२०१३
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