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मीर,ग़ालिब,दाग़,मोमिन,चार बैठे थे जहाँ, क्या बताएं,हम हक़ीरों ने भी कीं गुस्ताखियाँ,
भूल से इक लफ्ज़ भी पाई न उनसे दाद कुछ, बस करम इतना रहा के,सबकी खींचीं खुश्कियां.. उर्मिला माधव... 13.11.2015
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