ज़िन्दगी में टूटना ही टूटना देखा है हमने आज तक, या ख़ुशी का रूठना ही रूठना देखा है हमने आज तक, अब हमें मिलना ही क्या है,जो करें शिकवा कोई हम, साथ सबका छूटना ही छूटना देखा है हमने आज तक ... उर्मिला माधव... १२.११.२०१३...
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