Sunday, 11 November 2018

आज तक

ज़िन्दगी में टूटना ही टूटना देखा है हमने आज तक,
या ख़ुशी का रूठना ही रूठना देखा है हमने आज तक,
अब हमें मिलना ही क्या है,जो करें शिकवा कोई हम,
साथ सबका छूटना ही छूटना देखा है हमने आज तक ...
उर्मिला माधव...
१२.११.२०१३...

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