Friday, 9 November 2018

सवाली है

आज ये दिल बहुत सवाली है,
किसलिए रात इतनी काली है,

उन चरागों में रौशनी ही नहीं,
जिनकी रंगत महज़ दीवाली है,

ज़िन्दगी इस तरह बनाली है

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