तक़ल्लुफ़ में पड़ो हो क्यों मियां........रहने भी दो जाओ, बहे जाते है जो ख़ुद में ............उन्हें बहने भी दो जाओ, कभी कुछ मसअले दुनियां में मुश्किल भी हैं समझे क्या ? अगर तक़लीफ़ उनकी है ,......उन्हें सहने भी दो जाओ.. उर्मिला माधव, 29th november
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