मेरी नज़र का कोई एहतराम कर न सके, अजब कमाल रहा एक काम कर न सके,
वक़ार मेरी मुहब्बत का पुर कुशादह है, कमाल तुम हो के उठके सलाम कर न सके, उर्मिला माधव..
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