एक है ये मन ....सो स्थितप्रज्ञ है, कर्म समिधा हैं ऑ जीवन यज्ञ है, सब ही है अनुसार जीवन चक्र के, सर्वथा अनुभूति भी .....सर्वग्य है.. उर्मिला माधव, 1.1.2018
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