सब मिट्टी के सोपानों पर खड़े हुए हैं......आकर देख, जन जीवन की रीति यही है..अंतर्दृष्टि जगा कर देख, जब साहस उत्तुंग हुआ तब...रीति-नीति का बिंदु कहाँ, मार्ग सहज ही मिल जाता है,अपना पाँव बढ़ाकर देख, उर्मिला माधव... 12.12 2017...
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