कोई लालसा हमको अब होती ही कब है, वरना सब से खोद-खोद कर पूछा करते, कैसे हो, क्या करते हो अब, अच्छे हो ना ? ख़ामोशी पर सबकी, चुप-चुप रोया करते उर्मिला माधव
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