Wednesday, 24 October 2018

हुज्जूम था

सभी बेशकीमती दोस्तों के प्यार की बहुत ममनून हूँ ,
माज़रत चाहती हूँ---फ़र्दन-फ़र्दन शुक्रिया अदा नहीं कर पा रही हूँ...
इनबॉक्स में विश करने वाले सभी दोस्तों का बहुत शुक्रिया...
<3 <3 <3

जिस समय पैदा हुए ......हम को कहाँ मालूम था,
बेश क़ीमत प्यार से दिल किस क़दर महरूम था,
प्यारे-प्यारे दोस्तों के ......प्यार से काफ़ूर है अब,
रंज-ओ-ग़म का साथ मेरे ..वो जो एक हुज्जूम था.....
::::::
jis samay paida hue,hamko kahan maloom tha,
Besh qimat pyar se dil kis qadar mahroom tha,
Pyare-pyare doston ke....... pyar se kafoor hai,
Ranj-o-gham ka sath mere wo jo ik hujjoom tha...
Urmila Madhav....
25.10.2015

No comments:

Post a Comment