ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 1 February 2026
इक गुलामी की हदों
इक ग़ुलामी की हदों तक जा नहीं सकते हैं हम..
यूं समझ लीजै कि दिल का दिल से इस्तक़बाल है
उर्मिला माधव
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