ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 21 February 2026
गली गली में
गली-गली में ग़ालिब मिलते,हर नुक्कड़ इक मीर मिले,
बड़े ग़ज़ब के तेवर इनके जैसे इक शमशीर मिले,
बड़ी हिक़ारत से देखा जब उनसे दुआ सलाम हुई,
सोच रहे थे वो आख़िर क्यों मुफ़लिस को जागीर मिले,
उर्मिला माधव...
12.9.2016
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment