ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 7 February 2026
मग़रूर जैसे
लोग कुछ मगरूर जैसे लग रहे थे,
खुद ही खुद में,चूर जैसे लग रहे थे
वो बहुत मीठी ज़बां सब बोलते थे,
थे वहीँ.....पर दूर जैसे लग रहे थे,
उर्मिला माधव...
8.2.2014..
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