ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 28 February 2026
सीख लेगा
सीख लेगा अब ये दिल भी ज़ब्त का जो तौर है,
ग़ैर की महफ़िल की जानिब तेरा चश्म-ए- ग़ौर है,
ख़ुद ही शर्मिन्दा हैं खुद से,ग़ैर से शिक़वा ही क्या,
वो जो तेरी रह गुज़र थी उसका रुख़ कुछ और है .....उर्मिला माधव
1.3.2013
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