Thursday, 26 February 2026

ज़िंदगी ज़िंदादिली

ज़िन्दगी,ज़िन्दादिली बस नेमतों का हर्फ़ है,
है बुलन्दी एक जैसी, नाम भर का फ़र्क है,
भूल जाए ज़िन्दगी को जो इसे रुसवा करे,
ऐसी रुसवाई के मानी तो ज़रेब-ए-ज़र्फ़ है ।
....उर्मिला माधव..

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