ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 8 February 2026
दूरी
जिसे हम चांद कहते हैं उफ़क़ से देखता है वो,
ज़मीं पर हम खड़े हैं और हज़ारों मील की दूरी..
उर्मिला माधव
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