ये मेरे शेर और क़तआत ---
Wednesday, 11 February 2026
ज़िंदगी से खेलती
ज़िन्दगी से खेलती रहती हूँ मैं,
ग़म हज़ारों झेलती रहती हूँ मैं,
इक सुकून-ओ-चैन पाने के लिए,
कितने पापड़ बेलती रहती हूं मैं,
उर्मिला माधव
12.2.2019
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