ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 28 February 2026
सब के सब बहरूपिए
सियासत के नाम...
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सब के सब बहरूपिये से हो गए हैं,
चंद सिक्कों की ख़नक में,खो गए हैं,
दर्द की आवाज़ ये सब क्या सुनेंगे,
कान में उँगली लगा कर सो गए हैं....
उर्मिला माधव...
१.3.२०१४ ...
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