मैं तो शाइर हूँ..........चली आती हूँ, अदबी दुनियां के सिलसिले के तह्त, घूमना-फिरना .....इक शगल है मेरा, यूँ न समझें ......किसी गिले के तह्त.. उर्मिला माधव.. 2.7.2916
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