सच तो ये है कि सच नहीं ही कहा, ख़ास किस्सा तो बस छुपा ही रहा, मैंने ओलम का सिर्फ आ ही कहा, आ से बस आग और धुंआ ही रहा..... उर्मिला माधव... 1.7.2014...
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