हम चलें और तुम चलो और साथ सब चलने लगें, वक़्त से पहले ही नाहक़ हाथ क्यूँ मलने लगें ?? रास्ता मुश्किल तो है पर जायेंगे हम हश्र तक, बे-सबब ही मंजिलों से पहले क्यूँ ढलने लगें ?? उर्मिला माधव.. 7.6.2013
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