Saturday, 22 June 2019

समझते हैं

हम भी .हर इक सितम समझते हैं,
दह्र के ....पेच-ओ-ख़म समझते हैं,
ज़ुल्म कितना भी हो मगर फिर भी,
ख़ैरियत है कि …...हम समझते हैं..
उर्मिला माधव,
23.6.2017

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