मैं तो इंसाँ हूँ,मेरे क़िरदार की हस्ती क्या है? और तू भी इंसाँ है तो ये फ़िरक़ा परस्ती क्या है दश्त-ए-मुश्किल पे चलो चाक़ गरेबाँ लेकर और फिर देख तू कि प्यार की मस्ती क्या है ।।......उर्मिला माधव....
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