दिल ने उलट-पलट के वही दर्द दे दिए, जज़्बात मेरे हिस्से में सब सर्द दे दिए, शादाब एक बेल थी,शादाब कब रही, चेहरे पे जो भी रंग थे,सब ज़र्द दे दिये.. उर्मिला माधव, 19.6.2017 शादाब - हरी भरी
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