ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 27 June 2019
चराग़
हमको मालूम है ..........जहां वालो,
चराग़ जलते हुए, कैसा थरथराता है..
उर्मिला माधव
28.6.2018
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment