आप मेरी ना सुनें ये आपकी मर्ज़ी हुज़ूर,
हम जो अपनी बात कहते हैं कहेंगे ही ज़रूर,
नाव कागज़ की सही पर हौसला मजबूत है,
चल दिये तो देख लेना पार उतरेंगे ज़रूर,
मुद्दतों देखा किये हैं अर्श की जानिब अबस,
रास्ते तो हैं ज़मीं पर,देखना क्या इतनी दूर ?....
उर्मिला माधव..
7.2.2013
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