Wednesday, 31 July 2019

इफ़्तेख़ार

रोज़ .....सदमे हज़ार लगते हैं,
और फिर ...बार-बार लगते हैं,
हम अकेले ही ख़ास जाहिल हैं,
हमको ग़म इफ्तेख़ार लगते हैं.....
उर्मिला माधव...
1.8.2016

इफ्तेख़ार--- गौरव... मान...

No comments:

Post a Comment